जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के शोधकर्ताओं की एक टीम ने अमीबायसिस की वजह बने प्रोटोजोआ के खिलाफ नई दवा के अणु विकसित किए हैं।
अमीबायसिस (Amoebiasis) / अमीबा रक्तातिसार (Amoebic Dysentery) क्या है?
यह बृहदान्त्र (colon) में अमीबा ‘एन्टामोइबा हिस्टोलिटिका’ (Entamoeba histolytica) द्वारा होने वाला एक परजीवी संक्रमण है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एंटामोइबा हिस्टोलिटिका मनुष्यों में परजीवी बीमारी के कारण रुग्णता (अस्वस्थता) और मृत्यु का तीसरा प्रमुख कारण है।
यह प्रोटोजोआ प्रकृति में अवायवीय या कम हवा में जीवित रहने वाला है, जो ऑक्सीजन की अधिकता में जीवित नहीं रह सकता है।
हालांकि, संक्रमण के दौरान यह मानव शरीर के अंदर ऑक्सीजन की तेज वृद्धि का सामना करता है।
यह जीव ऑक्सीजन की अधिकता से उत्पन्न तनाव का मुकाबला करने के लिए बड़ी मात्रा में सिस्टीन का निर्माण करता है।
रोग का प्रसार
यह बीमारी, अधपका भोजन करने, दूषित पानी पाने अथवा दूषित पानी में धोये गए फलों अथवा सब्जियों को खाने से फैलती है।
लक्षण
- पेट में दर्द
- जठरांत्र (Gastrointestinal): मल में रक्त, दस्त अथवा पेट फूलना
- थकान, बुखार या भूख न लगना
- वजन कम होना
उपचार
स्वयं देखभाल तथा प्रोटोजोआ- प्रतिरोधी (antiparasitics) दवाइयां।
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